भला वे इस शब्द की संकल्पना को कैसे सोच-समझ सकते है? उनमें से अधिकतर को बममारी का अभ्यास करने की कल्पना थी और उसी साधारण लक्षण द्वारा हमारे वर्ग के साधारण निर्देश का काम चलाया गया। बारी साहब को जब कभी राजबंदियों की आवश्यकता पड़ती तब ‘जाओ, उस सात नंबर के बम-गोलेवाले को लेकर आओ’ अथवा ‘सब बम-गोलेवालों को अभी-के-अभी बंद करो’ ऐसी गर्जना होती। वहां जाने के पश्चात् सभी बंदियों को मैं देर-सवेर यह समझाता,‘अरे, हम बम-गोलों से लड़े,
भला वे इस शब्द की संकल्पना को कैसे सोच-समझ सकते है? उनमें से अधिकतर को बममारी का अभ्यास करने की कल्पना थी और उसी साधारण लक्षण द्वारा हमारे वर्ग के साधारण निर्देश का काम चलाया गया। बारी साहब को जब कभी राजबंदियों की आवश्यकता पड़ती तब ‘जाओ, उस सात नंबर के बम-गोलेवाले को लेकर आओ’ अथवा ‘सब बम-गोलेवालों को अभी-के-अभी बंद करो’ ऐसी गर्जना होती। वहां जाने के पश्चात् सभी बंदियों को मैं देर-सवेर यह समझाता,‘अरे, हम बम-गोलों से लड़े,