नारियल का गोला मिलता है (कोंकण में उसे ‘सोड़णे’ कहा जाता है), सुखाकर उसको कूटना और उनमें से जटाएं या रेशे ठीक तरह से निकालकर उन्हें साफ करने का काम उनको सौंपा जाता था। यह काम कठिन ही था, तथापि उतना कठिन नहीं था जितना कोल्हू से तेल निकालना। वास्तव में जिन बंदियों को पूरी तरह से अंगे्रजी स्पेलिंग भी नहीं आती, उन्हें भी इधर आते ही अथवा तनिक आगे-पीछे लिखने का काम सौंपकर ‘बाबू’ के तौर पर बंदियों पर अधिकार दिया जाता है। परंतु
नारियल का गोला मिलता है (कोंकण में उसे ‘सोड़णे’ कहा जाता है), सुखाकर उसको कूटना और उनमें से जटाएं या रेशे ठीक तरह से निकालकर उन्हें साफ करने का काम उनको सौंपा जाता था। यह काम कठिन ही था, तथापि उतना कठिन नहीं था जितना कोल्हू से तेल निकालना। वास्तव में जिन बंदियों को पूरी तरह से अंगे्रजी स्पेलिंग भी नहीं आती, उन्हें भी इधर आते ही अथवा तनिक आगे-पीछे लिखने का काम सौंपकर ‘बाबू’ के तौर पर बंदियों पर अधिकार दिया जाता है। परंतु