काल कोठरी में मेरे हाथ लग गया। उसके द्वारा इस वार्त्ता का तथ्य थोड़ा समझ में आया। लंदन में नूतन वर्ष के उपलक्ष्य में वहां के भारतीय लोगों द्वारा एक गोश्ठी आयोजित की गई थी। उस समय सभा की भित्तिा पर मेरी एक बड़ी सी तस्वीर लगाई गई थी। गोश्ठी के प्रधान अतिथि सर हेनरी काॅटन जैसे जाने माने सज्जन ने मेरी तस्वीर को संबोधित करते हुए साहस, देशभक्ति की अत्युत्कटता आादि कुछ गणों की प्रशंसा की थी और इसके लिए खेद भी व्यक्त किया था
काल कोठरी में मेरे हाथ लग गया। उसके द्वारा इस वार्त्ता का तथ्य थोड़ा समझ में आया। लंदन में नूतन वर्ष के उपलक्ष्य में वहां के भारतीय लोगों द्वारा एक गोश्ठी आयोजित की गई थी। उस समय सभा की भित्तिा पर मेरी एक बड़ी सी तस्वीर लगाई गई थी। गोश्ठी के प्रधान अतिथि सर हेनरी काॅटन जैसे जाने माने सज्जन ने मेरी तस्वीर को संबोधित करते हुए साहस, देशभक्ति की अत्युत्कटता आादि कुछ गणों की प्रशंसा की थी और इसके लिए खेद भी व्यक्त किया था