देखकर उन्नीस-बीस वर्शीय उस बेचारी युवा रमणी के ह्नदय को कितनी ठेस पहुंची होगी? दोनों सलाखों के पीछे खड़े थे। मुझे छूने के लिए भी उनपर प्रतिबंध लगाया गया था। पास ही पराए लोगों का कड़ा पहरा! म्न में ऐसे भाव उमड़ रहे हैं, जिनको श्शब्दों का सान्निध्य भी संकोचास्पद होता है। हाय! पचास वर्शों के अर्थात् आजीवन बिछोह के पूर्व विदा लेनी है और वह भी इन विदेशी निर्दयी काराधिकारियों के स्नेहशून्य दृश्टिपातों की कक्षा में। इस जन्म में
देखकर उन्नीस-बीस वर्शीय उस बेचारी युवा रमणी के ह्नदय को कितनी ठेस पहुंची होगी? दोनों सलाखों के पीछे खड़े थे। मुझे छूने के लिए भी उनपर प्रतिबंध लगाया गया था। पास ही पराए लोगों का कड़ा पहरा! म्न में ऐसे भाव उमड़ रहे हैं, जिनको श्शब्दों का सान्निध्य भी संकोचास्पद होता है। हाय! पचास वर्शों के अर्थात् आजीवन बिछोह के पूर्व विदा लेनी है और वह भी इन विदेशी निर्दयी काराधिकारियों के स्नेहशून्य दृश्टिपातों की कक्षा में। इस जन्म में