के बदले हेतुपूर्वक भेजा गया था-इधर-उधर देखकर (ळववक कंल कहते हुए) राम-राम किया। मैंने धीरे से पूछा, ‘‘कौन सी जेल है?’’ उसने साथ के भारतीय बंदी को पता न चले, इसलिए स्पेल करते हुए बताया-ठलबनससं (भायखला)।
प्रकरण -2
भायखला कारागृह
डोंगरी की एंकात कोठरी से भायखला की एकांत कोठरी पर चढ़ते समय गहराते एकांत तथा उदासीनता की अगली सीढ़ी चढ़नी पड़ी। डोंगरी में आस-पास कोई मनुष्य नहीं रहता था, परंतु कम-से-कम दूर से कोलाहल तो सुनाई
के बदले हेतुपूर्वक भेजा गया था-इधर-उधर देखकर (ळववक कंल कहते हुए) राम-राम किया। मैंने धीरे से पूछा, ‘‘कौन सी जेल है?’’ उसने साथ के भारतीय बंदी को पता न चले, इसलिए स्पेल करते हुए बताया-ठलबनससं (भायखला)।
प्रकरण -2
भायखला कारागृह
डोंगरी की एंकात कोठरी से भायखला की एकांत कोठरी पर चढ़ते समय गहराते एकांत तथा उदासीनता की अगली सीढ़ी चढ़नी पड़ी। डोंगरी में आस-पास कोई मनुष्य नहीं रहता था, परंतु कम-से-कम दूर से कोलाहल तो सुनाई