तब उसके कोमल मन की कैसी अवस्था होगी? और मुक्ति के पश्चात् वह कहां जाएगा? उसे कौन सहारा देगा? कौन उसकी शिक्षा पूरा कराएगा? यह नन्हा बालक जिस किसी द्वार पर पहुंचेगा, उसके द्वार उसी के सामने धड़ाधड़ बंद कर दिए जाएंगे। दुःखावेग में ये सारे विचार एक साथ तरंगित होकर पुनः डूब गए। उनमें कुछ विचार पुनः ह्नदय में उथल पुथल मचाते रहे।
दादा, यह लिजिए
वही वाॅर्डर फिर पास आया। काफी अंधेरा हो गया था।
‘‘दादा!’’
‘‘हां।’’
‘‘यह
तब उसके कोमल मन की कैसी अवस्था होगी? और मुक्ति के पश्चात् वह कहां जाएगा? उसे कौन सहारा देगा? कौन उसकी शिक्षा पूरा कराएगा? यह नन्हा बालक जिस किसी द्वार पर पहुंचेगा, उसके द्वार उसी के सामने धड़ाधड़ बंद कर दिए जाएंगे। दुःखावेग में ये सारे विचार एक साथ तरंगित होकर पुनः डूब गए। उनमें कुछ विचार पुनः ह्नदय में उथल पुथल मचाते रहे।
दादा, यह लिजिए
वही वाॅर्डर फिर पास आया। काफी अंधेरा हो गया था।
‘‘दादा!’’
‘‘हां।’’
‘‘यह