चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



जयसिंह – ‘आज आप बड़े मौके पर पहुँचे।’

बद्रीनाथ – ‘जी हाँ, अब आप कोई चिंता न करें। दो-एक दिन में ही जालिम खाँ को गिरफ्तार कर लूँगा।’

जयसिंह – ‘आपको जालिम खाँ की खबर कैसे लगी।’

बद्रीनाथ – ‘इसकी खबर तो नौगढ़ ही में लग गई थी, जिसका खुलासा हाल दूसरे वक्त कहूँगा। यहाँ पहुँचने पर शहर वालों को मैंने बहुत उदास और डर के मारे काँपते देखा। रास्ते में जो भी मुझको मिलता था, उसे बराबर ढाँढ़स देता था कि घबराओ मत अब मैं आ पहुँचा हूँ।,


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जयसिंह – ‘आज आप बड़े मौके पर पहुँचे।’

बद्रीनाथ – ‘जी हाँ, अब आप कोई चिंता न करें। दो-एक दिन में ही जालिम खाँ को गिरफ्तार कर लूँगा।’

जयसिंह – ‘आपको जालिम खाँ की खबर कैसे लगी।’

बद्रीनाथ – ‘इसकी खबर तो नौगढ़ ही में लग गई थी, जिसका खुलासा हाल दूसरे वक्त कहूँगा। यहाँ पहुँचने पर शहर वालों को मैंने बहुत उदास और डर के मारे काँपते देखा। रास्ते में जो भी मुझको मिलता था, उसे बराबर ढाँढ़स देता था कि घबराओ मत अब मैं आ पहुँचा हूँ।,


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