चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

पहुँच गया हूँ। पंद्रह दिन के अंदर इस शहर को उजाड़ कर दूँगा और आज के चौथे दिन बद्रीनाथ का सिर ले कर बारह बजे रात को तुम्हारे महल में पहुँचूँगा। होशियार। उस वक्त भी जिसका जी चाहे मुझे गिरफ्तार कर ले। देखूँ तो माई का लाल कौन निकलता है? जो कोई महाराज का दुश्मन हो और मुझसे मिलना चाहे वह ‘टेटी-चोटी’ में बारह बजे रात को मिल सकता है।

– आफत खाँ खूनी’

इस इश्तिहार ने तो महाराज के बचे-बचाए होश भी उड़ा दिए। बस यही जी में आता था कि इसी वक्त विजयगढ़ छोड़ के भाग जाएँ,


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पहुँच गया हूँ। पंद्रह दिन के अंदर इस शहर को उजाड़ कर दूँगा और आज के चौथे दिन बद्रीनाथ का सिर ले कर बारह बजे रात को तुम्हारे महल में पहुँचूँगा। होशियार। उस वक्त भी जिसका जी चाहे मुझे गिरफ्तार कर ले। देखूँ तो माई का लाल कौन निकलता है? जो कोई महाराज का दुश्मन हो और मुझसे मिलना चाहे वह ‘टेटी-चोटी’ में बारह बजे रात को मिल सकता है।

– आफत खाँ खूनी’

इस इश्तिहार ने तो महाराज के बचे-बचाए होश भी उड़ा दिए। बस यही जी में आता था कि इसी वक्त विजयगढ़ छोड़ के भाग जाएँ,


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