आपस में घुल रही थीं। अगर योगी जी का ख्याल न होता तो दोनों दिल खोल कर मिल लेते, मगर नहीं, दोनों ही को इस बात का ख्याल था कि इन प्रेम की निगाहों को योगी जी न जानने पाएँ। कुछ ठहर कर योगी और कुमार में बातचीत होने लगी।
योगी – ‘आप और आपकी मंडली के लोग कुशल-मंगल से तो हैं?’
कुमार – ‘आपकी दया से हर तरह से प्रसन्न हैं, परंतु…।
योगी – ‘परंतु क्या?’
कुमार – ‘परंतु कई बातों का भेद न खुलने से तबीयत को चैन नहीं है, फिर भी आशा है
आपस में घुल रही थीं। अगर योगी जी का ख्याल न होता तो दोनों दिल खोल कर मिल लेते, मगर नहीं, दोनों ही को इस बात का ख्याल था कि इन प्रेम की निगाहों को योगी जी न जानने पाएँ। कुछ ठहर कर योगी और कुमार में बातचीत होने लगी।
योगी – ‘आप और आपकी मंडली के लोग कुशल-मंगल से तो हैं?’
कुमार – ‘आपकी दया से हर तरह से प्रसन्न हैं, परंतु…।
योगी – ‘परंतु क्या?’
कुमार – ‘परंतु कई बातों का भेद न खुलने से तबीयत को चैन नहीं है, फिर भी आशा है