चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

आपस में घुल रही थीं। अगर योगी जी का ख्याल न होता तो दोनों दिल खोल कर मिल लेते, मगर नहीं, दोनों ही को इस बात का ख्याल था कि इन प्रेम की निगाहों को योगी जी न जानने पाएँ। कुछ ठहर कर योगी और कुमार में बातचीत होने लगी।

योगी – ‘आप और आपकी मंडली के लोग कुशल-मंगल से तो हैं?’

कुमार – ‘आपकी दया से हर तरह से प्रसन्न हैं, परंतु…।

योगी – ‘परंतु क्या?’

कुमार – ‘परंतु कई बातों का भेद न खुलने से तबीयत को चैन नहीं है, फिर भी आशा है


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आपस में घुल रही थीं। अगर योगी जी का ख्याल न होता तो दोनों दिल खोल कर मिल लेते, मगर नहीं, दोनों ही को इस बात का ख्याल था कि इन प्रेम की निगाहों को योगी जी न जानने पाएँ। कुछ ठहर कर योगी और कुमार में बातचीत होने लगी।

योगी – ‘आप और आपकी मंडली के लोग कुशल-मंगल से तो हैं?’

कुमार – ‘आपकी दया से हर तरह से प्रसन्न हैं, परंतु…।

योगी – ‘परंतु क्या?’

कुमार – ‘परंतु कई बातों का भेद न खुलने से तबीयत को चैन नहीं है, फिर भी आशा है


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