बाईं तरफ रखे जालिम खाँ की बात खूब गौर से सुनता और जवाब देता है।
जालिम खाँ – ‘तुम्हारे मिल जाने से बड़ा सहारा हो गया।’
आफत खाँ – ‘इसी तरह मुझको तुम्हारे मिलने से। देखो यह गंडासा, (हाथ में ले कर) इसी से हजारों आदमियों की जानें जाएँगी। मैं सिवाय इसके कोई दूसरा हरबा नहीं रखता। यह जहर से बुझाया हुआ है, जिसे जरा भी इसका जख्म लग जाए फिर उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं।’
जालिम – ‘बहुत हैरान होने पर तुमसे मुलाकात हुई।’
आफत – ‘मुझे तुमसे जरूर मिलना था,
बाईं तरफ रखे जालिम खाँ की बात खूब गौर से सुनता और जवाब देता है।
जालिम खाँ – ‘तुम्हारे मिल जाने से बड़ा सहारा हो गया।’
आफत खाँ – ‘इसी तरह मुझको तुम्हारे मिलने से। देखो यह गंडासा, (हाथ में ले कर) इसी से हजारों आदमियों की जानें जाएँगी। मैं सिवाय इसके कोई दूसरा हरबा नहीं रखता। यह जहर से बुझाया हुआ है, जिसे जरा भी इसका जख्म लग जाए फिर उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं।’
जालिम – ‘बहुत हैरान होने पर तुमसे मुलाकात हुई।’
आफत – ‘मुझे तुमसे जरूर मिलना था,