चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



तेजसिंह ने पुकार कर कहा – ‘घबराइए नहीं, हम दोनों आपके दुश्मन नहीं हैं। ये जो हमारे साथ हैं और जिन्हें आप कुछ और समझे हुए हैं, वास्तव में पंडित बद्रीनाथ हैं।’ यह कह आफत खाँ की दाढ़ी हाथ से पकड़ कर झटक दी जिससे बद्रीनाथ कुछ पहचाने गए।

आप महाराज जयसिंह का जी ठिकाने हुआ, पूछा – ‘बद्रीनाथ उनके साथ क्यों थे?’

बद्रीनाथ – ‘महाराज, अगर मैं उनका साथी न बनता तो उन लोगों को यहाँ तक ला कर गिरफ्तार कौन कराता?’

महाराज – ‘तुम्हारे हाथ में यह सिर किसका लटक रहा है?’


1088 of 1230



तेजसिंह ने पुकार कर कहा – ‘घबराइए नहीं, हम दोनों आपके दुश्मन नहीं हैं। ये जो हमारे साथ हैं और जिन्हें आप कुछ और समझे हुए हैं, वास्तव में पंडित बद्रीनाथ हैं।’ यह कह आफत खाँ की दाढ़ी हाथ से पकड़ कर झटक दी जिससे बद्रीनाथ कुछ पहचाने गए।

आप महाराज जयसिंह का जी ठिकाने हुआ, पूछा – ‘बद्रीनाथ उनके साथ क्यों थे?’

बद्रीनाथ – ‘महाराज, अगर मैं उनका साथी न बनता तो उन लोगों को यहाँ तक ला कर गिरफ्तार कौन कराता?’

महाराज – ‘तुम्हारे हाथ में यह सिर किसका लटक रहा है?’


1088 of 1230