सुबह को खुशी-खुशी महाराज ने दरबार किया। तेजसिंह और बद्रीनाथ भी बड़ी इज्जत से बैठाए गए। महाराज के हुक्म से जालिम खाँ और उसके चारों साथी दरबार में लाए गए जो हथकड़ी-बेड़ी से जकड़े हुए थे। हुक्म पा तेजसिंह, जालिम खाँ से पूछने लगे –
तेजसिंह – ‘क्यों जी, तुम्हारा नाम ठीक-ठीक जालिम खाँ है या और कुछ?’
जालिम – ‘इसका जवाब मैं पीछे दूँगा, पहले यह बताइए कि आप लोगों के यहाँ ऐयारों को मार डालने का कायदा है या नहीं?’
तेजसिंह – ‘हमारे
सुबह को खुशी-खुशी महाराज ने दरबार किया। तेजसिंह और बद्रीनाथ भी बड़ी इज्जत से बैठाए गए। महाराज के हुक्म से जालिम खाँ और उसके चारों साथी दरबार में लाए गए जो हथकड़ी-बेड़ी से जकड़े हुए थे। हुक्म पा तेजसिंह, जालिम खाँ से पूछने लगे –
तेजसिंह – ‘क्यों जी, तुम्हारा नाम ठीक-ठीक जालिम खाँ है या और कुछ?’
जालिम – ‘इसका जवाब मैं पीछे दूँगा, पहले यह बताइए कि आप लोगों के यहाँ ऐयारों को मार डालने का कायदा है या नहीं?’
तेजसिंह – ‘हमारे