चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



तेजसिंह – ‘यह वादा कभी नहीं हो सकता और अपना ठीक-ठीक हाल भी तुमको झख मार कर कहना होगा।’

जालिम – ‘कभी नहीं कहेंगे।’

तेजसिंह – ‘फिर जूतों से तुम्हारे सिर की खबर खूब ली जाएगी।’

जालिम – ‘चाहे जो हो।’

बद्रीनाथ – ‘वाह रे जूतीखोर।’

जालिम – (बद्रीनाथ से) ‘उस्ताद, तुमने बड़ा धोखा दिया, मानता हूँ तुमको।’

बद्रीनाथ – ‘तुम्हारे मानने से होता ही क्या है, आज नहीं तो कल तुम लोगों के सिर धड़ से अलग दिखाई देंगे।’

जालिम – ‘अफसोस कुछ करने न पाए।’


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तेजसिंह – ‘यह वादा कभी नहीं हो सकता और अपना ठीक-ठीक हाल भी तुमको झख मार कर कहना होगा।’

जालिम – ‘कभी नहीं कहेंगे।’

तेजसिंह – ‘फिर जूतों से तुम्हारे सिर की खबर खूब ली जाएगी।’

जालिम – ‘चाहे जो हो।’

बद्रीनाथ – ‘वाह रे जूतीखोर।’

जालिम – (बद्रीनाथ से) ‘उस्ताद, तुमने बड़ा धोखा दिया, मानता हूँ तुमको।’

बद्रीनाथ – ‘तुम्हारे मानने से होता ही क्या है, आज नहीं तो कल तुम लोगों के सिर धड़ से अलग दिखाई देंगे।’

जालिम – ‘अफसोस कुछ करने न पाए।’


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