तेजसिंह – ‘यह वादा कभी नहीं हो सकता और अपना ठीक-ठीक हाल भी तुमको झख मार कर कहना होगा।’
जालिम – ‘कभी नहीं कहेंगे।’
तेजसिंह – ‘फिर जूतों से तुम्हारे सिर की खबर खूब ली जाएगी।’
जालिम – ‘चाहे जो हो।’
बद्रीनाथ – ‘वाह रे जूतीखोर।’
जालिम – (बद्रीनाथ से) ‘उस्ताद, तुमने बड़ा धोखा दिया, मानता हूँ तुमको।’
बद्रीनाथ – ‘तुम्हारे मानने से होता ही क्या है, आज नहीं तो कल तुम लोगों के सिर धड़ से अलग दिखाई देंगे।’
जालिम – ‘अफसोस कुछ करने न पाए।’
तेजसिंह – ‘यह वादा कभी नहीं हो सकता और अपना ठीक-ठीक हाल भी तुमको झख मार कर कहना होगा।’
जालिम – ‘कभी नहीं कहेंगे।’
तेजसिंह – ‘फिर जूतों से तुम्हारे सिर की खबर खूब ली जाएगी।’
जालिम – ‘चाहे जो हो।’
बद्रीनाथ – ‘वाह रे जूतीखोर।’
जालिम – (बद्रीनाथ से) ‘उस्ताद, तुमने बड़ा धोखा दिया, मानता हूँ तुमको।’
बद्रीनाथ – ‘तुम्हारे मानने से होता ही क्या है, आज नहीं तो कल तुम लोगों के सिर धड़ से अलग दिखाई देंगे।’
जालिम – ‘अफसोस कुछ करने न पाए।’