का इंतजाम कर दिया और फिर तुरंत लौट कर दरबार में चले आए।
पहले दरबार में जितनी भीड़ लगी हुई थी अब उससे चौथाई रह गई। कुछ तो अपनी मर्जी से बद्रीनाथ के साथ दौड़ गए, कितनों ने महाराज का इशारा पा कर उसका पीछा किया था। तेजसिंह के वापस आने पर महाराज ने पूछा – ‘तुम कहाँ गए थे?’
तेजसिंह – ‘मुझे यह फिक्र पड़ गई थी कि कहीं जालिम खाँ वगैरह तो नहीं छूट गए, इसलिए कैदखाने की तरफ दौड़ा गया था, मगर वे लोग कैदखाने में ही पाए गए।’
महाराज
का इंतजाम कर दिया और फिर तुरंत लौट कर दरबार में चले आए।
पहले दरबार में जितनी भीड़ लगी हुई थी अब उससे चौथाई रह गई। कुछ तो अपनी मर्जी से बद्रीनाथ के साथ दौड़ गए, कितनों ने महाराज का इशारा पा कर उसका पीछा किया था। तेजसिंह के वापस आने पर महाराज ने पूछा – ‘तुम कहाँ गए थे?’
तेजसिंह – ‘मुझे यह फिक्र पड़ गई थी कि कहीं जालिम खाँ वगैरह तो नहीं छूट गए, इसलिए कैदखाने की तरफ दौड़ा गया था, मगर वे लोग कैदखाने में ही पाए गए।’
महाराज