चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

के बाद तेजसिंह ने कहा – ‘अब आप और महाराज सुरेंद्रसिंह खोह में चलें और सिद्धनाथ योगी की कृपा से कुमारी को साथ ले कर खुशी-खुशी लौट आएँ।’

तेजसिंह की बात से महाराज को कितनी खुशी हुई इसका हाल लिखना मुश्किल है। लपक कर तेजसिंह को गले लगा लिया और कहा – ‘तुम अभी बाहर जा कर हरदयालसिंह को हमारे सफर की तैयारी करने का हुक्म दो और तुम लोग भी स्नान-पूजा करके कुछ खाओ-पीओ। मैं जा कर कुमारी की माँ को यह खुशखबरी सुनाता हूँ।’

आज के दिन का तीन हिस्सा आश्चर्य,


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के बाद तेजसिंह ने कहा – ‘अब आप और महाराज सुरेंद्रसिंह खोह में चलें और सिद्धनाथ योगी की कृपा से कुमारी को साथ ले कर खुशी-खुशी लौट आएँ।’

तेजसिंह की बात से महाराज को कितनी खुशी हुई इसका हाल लिखना मुश्किल है। लपक कर तेजसिंह को गले लगा लिया और कहा – ‘तुम अभी बाहर जा कर हरदयालसिंह को हमारे सफर की तैयारी करने का हुक्म दो और तुम लोग भी स्नान-पूजा करके कुछ खाओ-पीओ। मैं जा कर कुमारी की माँ को यह खुशखबरी सुनाता हूँ।’

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