सुर्ख सखी – ‘इसमें काम ही कितना था, इस पर सिद्धनाथ बाबा की मदद।’
वनकन्या – ‘खैर, एक बात तो है।’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : सोलहवां बयान)
अपनी जगह पर दीवान हरदयालसिंह को छोड़, तेजसिंह और बद्रीनाथ को साथ ले कर महाराज जयसिंह विजयगढ़ से नौगढ़ की तरफ रवाना हुए। साथ में सिर्फ पाँच सौ आदमियों का झमेला था। एक दिन रास्ते में लगा, दूसरे दिन नौगढ़ के करीब पहुँच कर डेरा डाला।
राजा सुरेंद्रसिंह को महाराज जयसिंह के पहुँचने की खबर
सुर्ख सखी – ‘इसमें काम ही कितना था, इस पर सिद्धनाथ बाबा की मदद।’
वनकन्या – ‘खैर, एक बात तो है।’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : सोलहवां बयान)
अपनी जगह पर दीवान हरदयालसिंह को छोड़, तेजसिंह और बद्रीनाथ को साथ ले कर महाराज जयसिंह विजयगढ़ से नौगढ़ की तरफ रवाना हुए। साथ में सिर्फ पाँच सौ आदमियों का झमेला था। एक दिन रास्ते में लगा, दूसरे दिन नौगढ़ के करीब पहुँच कर डेरा डाला।
राजा सुरेंद्रसिंह को महाराज जयसिंह के पहुँचने की खबर