चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

मगर बाबा जी ने इसे भी मंजूर न करके कहा – ‘महाराज, मैं इस लायक नहीं, आपका दर्जा मुझसे बहुत बड़ा है।’

सुरेंद्र – ‘साधुओं से बढ़ कर किसी का दर्जा नहीं हो सकता।’

बाबा जी – आपका कहना बहुत ठीक है, मगर आपको मालूम नहीं कि मैं किस तरह का साधु हूँ।’

सुरेंद्र – ‘साधु चाहे किसी तरह का हो पूजने ही योग्य है।’

बाबा जी – ‘किसी तरह का हो, मगर साधु हो तब तो।’

सुरेंद्र – ‘तो आप कौन हैं?’

बाबा जी – ‘कोई भी नहीं।’

जयसिंह – ‘आपकी बातें


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मगर बाबा जी ने इसे भी मंजूर न करके कहा – ‘महाराज, मैं इस लायक नहीं, आपका दर्जा मुझसे बहुत बड़ा है।’

सुरेंद्र – ‘साधुओं से बढ़ कर किसी का दर्जा नहीं हो सकता।’

बाबा जी – आपका कहना बहुत ठीक है, मगर आपको मालूम नहीं कि मैं किस तरह का साधु हूँ।’

सुरेंद्र – ‘साधु चाहे किसी तरह का हो पूजने ही योग्य है।’

बाबा जी – ‘किसी तरह का हो, मगर साधु हो तब तो।’

सुरेंद्र – ‘तो आप कौन हैं?’

बाबा जी – ‘कोई भी नहीं।’

जयसिंह – ‘आपकी बातें


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