से वनकन्या आती दिखाई पड़ी। दोनों बगल उसके दो सखियाँ और पीछे-पीछे दस-पंद्रह लौंडियों की भीड़ थीं।
बाबा जी – (वनकन्या की तरफ इशारा करके) ‘इस जगह की मालिक यही हैं।’
सिद्धनाथ बाबा की बात सुन कर दोनों महाराज और ऐयार लोग, ताज्जुब से वनकन्या की तरफ देखने लगे। इस वक्त कुँवर वीरेंद्रसिंह और तेजसिंह भी हैरान हो वनकन्या की तरफ देख रहे थे। सिद्धनाथ की जुबानी यह सुन कर कि इस जगह की मालिक यही है, कुमार और तेजसिंह को पिछली बातें याद
से वनकन्या आती दिखाई पड़ी। दोनों बगल उसके दो सखियाँ और पीछे-पीछे दस-पंद्रह लौंडियों की भीड़ थीं।
बाबा जी – (वनकन्या की तरफ इशारा करके) ‘इस जगह की मालिक यही हैं।’
सिद्धनाथ बाबा की बात सुन कर दोनों महाराज और ऐयार लोग, ताज्जुब से वनकन्या की तरफ देखने लगे। इस वक्त कुँवर वीरेंद्रसिंह और तेजसिंह भी हैरान हो वनकन्या की तरफ देख रहे थे। सिद्धनाथ की जुबानी यह सुन कर कि इस जगह की मालिक यही है, कुमार और तेजसिंह को पिछली बातें याद