इन्होंने तो मुझसे सख्त कसम खिला दी है, इसी से मैं कुछ भी नहीं कह सकती।’
बाबा जी – ‘आप जल्दी क्यों करते हैं। अभी थोड़ी देर में मेरा हाल भी आपको मालूम हो जाएगा, पहले चल कर उन चीजों को तो देखिए जो कुमारी चंद्रकांता को इस तिलिस्म से मिली हैं।’
जयसिंह – ‘जैसी आपकी मर्जी।’
बाबा जी उसी वक्त उठ खड़े हुए और सभी को साथ ले, दूसरे बाग की तरफ चले।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : इक्कीसवां बयान)
बाबा जी यहाँ से उठ कर महाराज जयसिंह वगैरह
इन्होंने तो मुझसे सख्त कसम खिला दी है, इसी से मैं कुछ भी नहीं कह सकती।’
बाबा जी – ‘आप जल्दी क्यों करते हैं। अभी थोड़ी देर में मेरा हाल भी आपको मालूम हो जाएगा, पहले चल कर उन चीजों को तो देखिए जो कुमारी चंद्रकांता को इस तिलिस्म से मिली हैं।’
जयसिंह – ‘जैसी आपकी मर्जी।’
बाबा जी उसी वक्त उठ खड़े हुए और सभी को साथ ले, दूसरे बाग की तरफ चले।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : इक्कीसवां बयान)
बाबा जी यहाँ से उठ कर महाराज जयसिंह वगैरह