चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

जयसिंह और सुरेंद्रसिंह का आपस में दिली प्रेम कितना बढ़-चढ़ रहा है वे ही जानते होंगे। कुमारी चंद्रकांता को घर ले जाने के बाद शादी के लिए खत भेजने की ताब किसे? जयसिंह ने उसी वक्त कुमारी चंद्रकांता के हाथ पकड़ के राजा सुरेंद्रसिंह के पैर पर डाल दिया और डबडबाई आँखों को पोंछ कर कहा – ‘आप आज्ञा कीजिए कि इस लड़की को मैं अपने घर ले जाऊँ और जात-बिरादरी तथा पंडित लोगों के सामने कुँवर वीरेंद्रसिंह की लौंडी बनाऊँ।’

राजा सुरेंद्रसिंह


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जयसिंह और सुरेंद्रसिंह का आपस में दिली प्रेम कितना बढ़-चढ़ रहा है वे ही जानते होंगे। कुमारी चंद्रकांता को घर ले जाने के बाद शादी के लिए खत भेजने की ताब किसे? जयसिंह ने उसी वक्त कुमारी चंद्रकांता के हाथ पकड़ के राजा सुरेंद्रसिंह के पैर पर डाल दिया और डबडबाई आँखों को पोंछ कर कहा – ‘आप आज्ञा कीजिए कि इस लड़की को मैं अपने घर ले जाऊँ और जात-बिरादरी तथा पंडित लोगों के सामने कुँवर वीरेंद्रसिंह की लौंडी बनाऊँ।’

राजा सुरेंद्रसिंह


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