चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

और चपला धीरे-धीरे टहलती हुई बीच के फौव्वारे के पास जा निकलीं और उसकी चक्करदार टूटियों से निकलते हुए जल का तमाशा देखने लगीं।

चपला : न मालूम चम्पा किधर चली गयी?

चन्द्रकान्ता : कहीं इधर- उधर घूमती होगी।

चपला : दो घड़ी से ज्यादा हो गया, तब से वह हम लोगों के साथ नहीं है।

चन्द्रकान्ता : देखो वह आ रही है।

चपला : इस वक्त तो उसकी चाल में फर्क मालूम होता है।

इतने में चम्पा ने आकर फूलों का एक गुच्छा चन्द्रकान्ता के हाथ में दिया और कहा,


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और चपला धीरे-धीरे टहलती हुई बीच के फौव्वारे के पास जा निकलीं और उसकी चक्करदार टूटियों से निकलते हुए जल का तमाशा देखने लगीं।

चपला : न मालूम चम्पा किधर चली गयी?

चन्द्रकान्ता : कहीं इधर- उधर घूमती होगी।

चपला : दो घड़ी से ज्यादा हो गया, तब से वह हम लोगों के साथ नहीं है।

चन्द्रकान्ता : देखो वह आ रही है।

चपला : इस वक्त तो उसकी चाल में फर्क मालूम होता है।

इतने में चम्पा ने आकर फूलों का एक गुच्छा चन्द्रकान्ता के हाथ में दिया और कहा,


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