चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

जो हो गया सो हो गया, मगर अब धोखा मत खाइएगा।’’ कुमार बहुत शर्मिन्दा थे, इसका कुछ जवाब न दे विजयगढ़ का हाल पूछने लगे। तेजसिंह ने सब खुलासा ब्यौरा कहा और चिट्ठी भी दिखाई जो महाराज जयसिंह ने राजा सुरेन्द्रसिंह के नाम लिखी थी। कुमार यह सब सुन और चिट्ठी देख उछल पड़े, मारे खुशी के तेजसिंह को गले से लगा लिया और बोले, ‘‘अब जो कुछ करना हो जल्दी कर डालो।’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘हाँ, देखो सब कुछ हो जाता है, घबराओ मत।’’ इसी तरह दोनों को बातें करते तमाम रात गुजर गई।


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जो हो गया सो हो गया, मगर अब धोखा मत खाइएगा।’’ कुमार बहुत शर्मिन्दा थे, इसका कुछ जवाब न दे विजयगढ़ का हाल पूछने लगे। तेजसिंह ने सब खुलासा ब्यौरा कहा और चिट्ठी भी दिखाई जो महाराज जयसिंह ने राजा सुरेन्द्रसिंह के नाम लिखी थी। कुमार यह सब सुन और चिट्ठी देख उछल पड़े, मारे खुशी के तेजसिंह को गले से लगा लिया और बोले, ‘‘अब जो कुछ करना हो जल्दी कर डालो।’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘हाँ, देखो सब कुछ हो जाता है, घबराओ मत।’’ इसी तरह दोनों को बातें करते तमाम रात गुजर गई।


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