चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

ही चाहते थे कि दीवार फांदकर एक आदमी ने आकर हाथ पकड़ लिया।

तेजसिंह ने उस आदमी को देखा जो सिर से पैर तक सिन्दूर से रंगा हुआ था उसने कहा-

‘‘काहे को देते हो जान, मेरी बात सुनो दे कान
यह सब खेल ठगी को मान, लाश देखकर लो पहचान
उठो देखो भालो, खोजो खोज निकालो’’

यह कह वह दांत दिखलाता उछलता-कूदता भाग गया।













चन्द्रकान्ता ( दूसरा भाग : पहला बयान)

इस आदमी को सभी ने देखा मगर हैरान थे कि यह कौन है, कैसे आया और क्या कह गया। तेजसिंह ने जोर से पुकार के कहा,


338 of 1230

ही चाहते थे कि दीवार फांदकर एक आदमी ने आकर हाथ पकड़ लिया।

तेजसिंह ने उस आदमी को देखा जो सिर से पैर तक सिन्दूर से रंगा हुआ था उसने कहा-

‘‘काहे को देते हो जान, मेरी बात सुनो दे कान
यह सब खेल ठगी को मान, लाश देखकर लो पहचान
उठो देखो भालो, खोजो खोज निकालो’’

यह कह वह दांत दिखलाता उछलता-कूदता भाग गया।













चन्द्रकान्ता ( दूसरा भाग : पहला बयान)

इस आदमी को सभी ने देखा मगर हैरान थे कि यह कौन है, कैसे आया और क्या कह गया। तेजसिंह ने जोर से पुकार के कहा,


338 of 1230