चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

भी देवीसिंह को गले लगाया और बैठने के लिए कहा। फतहसिंह सिपहसालार ने भी उनको सलाम किया। जब देवीसिंह बैठ गये, तेजसिंह उनकी तारीफ करने लगे।

कुमार ने पूछा, “कहो देवीसिह, तुमने यहां आकर क्या-क्या किया?”

तेजसिह ने कहा, “इनका हाल मुझसे सुनिये, मैं मुख्तसर में आपको समझा देता हूं।”

कुमार ने कहा, “कहो!”

तेजसिंह बोले, “जब आप चंद्रकान्ता के बाग में बैठे थे और भूत ने आकर कहा था कि ‘खबर भई राजा को तुमरी सुनो गुरुजी मेरे!’ जिसको सुनकर मैंने जबर्दस्ती आपको वहां से उठाया था,


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भी देवीसिंह को गले लगाया और बैठने के लिए कहा। फतहसिंह सिपहसालार ने भी उनको सलाम किया। जब देवीसिंह बैठ गये, तेजसिंह उनकी तारीफ करने लगे।

कुमार ने पूछा, “कहो देवीसिह, तुमने यहां आकर क्या-क्या किया?”

तेजसिह ने कहा, “इनका हाल मुझसे सुनिये, मैं मुख्तसर में आपको समझा देता हूं।”

कुमार ने कहा, “कहो!”

तेजसिंह बोले, “जब आप चंद्रकान्ता के बाग में बैठे थे और भूत ने आकर कहा था कि ‘खबर भई राजा को तुमरी सुनो गुरुजी मेरे!’ जिसको सुनकर मैंने जबर्दस्ती आपको वहां से उठाया था,


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