चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



यह सुनकर कुमार ने देवीसिंह की पीठ ठोंकी और बोले, “शाबास! किस मुंह से तारीफ करें, दो घर तुमने बचाये।”

देवीसिंह ने कहा, “मैं किस लायक हूं जो आप इतनी तारीफ करते हैं, तारीफ सब कामों से निश्चित होकर कीजियेगा, इस वक्त चंद्रकान्ता को छुड़ाने की फिक्र करनी चाहिए, अगर देर होगी तो न जाने उनकी जान पर क्या आ बने। सिवाय इसके इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि अगर हम लोग बिल्कुल चंद्रकान्ता ही की खोज में लीन हो जायेंगे तो महाराज की लड़ाई का नतीजा बुरा हो जायगा!”


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यह सुनकर कुमार ने देवीसिंह की पीठ ठोंकी और बोले, “शाबास! किस मुंह से तारीफ करें, दो घर तुमने बचाये।”

देवीसिंह ने कहा, “मैं किस लायक हूं जो आप इतनी तारीफ करते हैं, तारीफ सब कामों से निश्चित होकर कीजियेगा, इस वक्त चंद्रकान्ता को छुड़ाने की फिक्र करनी चाहिए, अगर देर होगी तो न जाने उनकी जान पर क्या आ बने। सिवाय इसके इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि अगर हम लोग बिल्कुल चंद्रकान्ता ही की खोज में लीन हो जायेंगे तो महाराज की लड़ाई का नतीजा बुरा हो जायगा!”


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