चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

पहले ही हवा खाने चली जाती है।” देवीसिंह की बात तीर की तरह शिवदत्त के कलेजे के पार हो गई। बोले, “पकड़ो इस बेअदब को!” इतना कहना था कि कई चोबदार देवीसिंह की तरफ झुके। इन्होंने खंजर निकाल दो-तीन चोबदारों की सफाई कर डाली और फुर्ती से अपने ऐयारी के बटुए में से एक गेंद निकालकर जोर से जमीन पर मारी जिससे बड़ी भारी आवाज हुई। दरबार दहल उठा, महाराज एकदम चौंक पड़े जिससे सिर का शमला जिस पर हीरे का सरपेंच था जमीन पर गिर पड़ा। लपक के


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पहले ही हवा खाने चली जाती है।” देवीसिंह की बात तीर की तरह शिवदत्त के कलेजे के पार हो गई। बोले, “पकड़ो इस बेअदब को!” इतना कहना था कि कई चोबदार देवीसिंह की तरफ झुके। इन्होंने खंजर निकाल दो-तीन चोबदारों की सफाई कर डाली और फुर्ती से अपने ऐयारी के बटुए में से एक गेंद निकालकर जोर से जमीन पर मारी जिससे बड़ी भारी आवाज हुई। दरबार दहल उठा, महाराज एकदम चौंक पड़े जिससे सिर का शमला जिस पर हीरे का सरपेंच था जमीन पर गिर पड़ा। लपक के


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