पैदा कर लाया!” यह कह शमले में से सरपेंच खोल बटुए में दाखिल किया।
कुमार ने कहा, “भला तुम इसका क्या करोगे, तुम्हारे किस मतलब का है?”
तेजसिंह ने जवाब दिया, “इसका नाम फतह का सरपेंच है, जिस रोज आपकी बारात निकलेगी महाराज शिवदत्त की सूरत बना इसी को माथे पर बांधा मैं आगे-आगे झण्डा लेकर चलूंगा।”
यह सुनकर कुमार ने हंस दिया, पर साथ ही इसके दो बूंद आंसू आंखों से निकल पड़े जिनको जल्दी से कुमार ने रूमाल से पोंछ लिया। तेजसिंह समझ
पैदा कर लाया!” यह कह शमले में से सरपेंच खोल बटुए में दाखिल किया।
कुमार ने कहा, “भला तुम इसका क्या करोगे, तुम्हारे किस मतलब का है?”
तेजसिंह ने जवाब दिया, “इसका नाम फतह का सरपेंच है, जिस रोज आपकी बारात निकलेगी महाराज शिवदत्त की सूरत बना इसी को माथे पर बांधा मैं आगे-आगे झण्डा लेकर चलूंगा।”
यह सुनकर कुमार ने हंस दिया, पर साथ ही इसके दो बूंद आंसू आंखों से निकल पड़े जिनको जल्दी से कुमार ने रूमाल से पोंछ लिया। तेजसिंह समझ