बहादुर लोग चोट्टे भी होते हैं? जवांमर्दी से लड़कर चंद्रकान्ता न ली गई? लानत है ऐसी बहादुरी पर!” वीरेन्द्रसिंह की बात तीर की तरह महाराज शिवदत्त के कलेजे में लगी। कुछ जवाब तो न दे सके, गुस्से में भरे हुए बड़े जोर से कुमार पर नेजा चलाया, कुमार ने अपने नेजे से ऐसा झटका दिया कि उनके हाथ से नेजा छटककर दूर जा गिरा।
यह तमाशा देख दोस्त-दुश्मन दोनों तरफ से ‘वाह-वाह’ की आवाज आने लगी। शिवदत्त बहुत बिगड़ा और तलवार निकालकर कुमार पर दौड़ा,
बहादुर लोग चोट्टे भी होते हैं? जवांमर्दी से लड़कर चंद्रकान्ता न ली गई? लानत है ऐसी बहादुरी पर!” वीरेन्द्रसिंह की बात तीर की तरह महाराज शिवदत्त के कलेजे में लगी। कुछ जवाब तो न दे सके, गुस्से में भरे हुए बड़े जोर से कुमार पर नेजा चलाया, कुमार ने अपने नेजे से ऐसा झटका दिया कि उनके हाथ से नेजा छटककर दूर जा गिरा।
यह तमाशा देख दोस्त-दुश्मन दोनों तरफ से ‘वाह-वाह’ की आवाज आने लगी। शिवदत्त बहुत बिगड़ा और तलवार निकालकर कुमार पर दौड़ा,