के इस तरह आकर फिर जाने से ताज्जुब हुआ मगर पूछता कौन?मजाल किसकी थी? तेजसिंह ने जब महाराज को फिरते देखा तो चाहा कि वहीं बगल में छिप रहें, मगर छिप न सके क्योंकि नाला तंग था और ऊपर चढ़ जाने को भी कहीं जगह न थी, लाचार नाले के बाहर होना ही पड़ा। तेजी के साथ महाराज के पहले नाले के बाहर हो गये और एक किनारे छिप रहे। महाराज वहां से निकल शहर की तरफ रवाना हुए।
अब तेजसिंह सोचने लगे कि यहां से मैं अकेले चंद्रकान्ता को कैसे छुड़ा सकूंगा। लड़ने का मौका नहीं,
के इस तरह आकर फिर जाने से ताज्जुब हुआ मगर पूछता कौन?मजाल किसकी थी? तेजसिंह ने जब महाराज को फिरते देखा तो चाहा कि वहीं बगल में छिप रहें, मगर छिप न सके क्योंकि नाला तंग था और ऊपर चढ़ जाने को भी कहीं जगह न थी, लाचार नाले के बाहर होना ही पड़ा। तेजी के साथ महाराज के पहले नाले के बाहर हो गये और एक किनारे छिप रहे। महाराज वहां से निकल शहर की तरफ रवाना हुए।
अब तेजसिंह सोचने लगे कि यहां से मैं अकेले चंद्रकान्ता को कैसे छुड़ा सकूंगा। लड़ने का मौका नहीं,