चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

गहने सब टूटे-फूटे पड़े थे और चारों तरफ खून जमा हुआ था। कुमार से न रहा गया, एकदम ‘हाय’ करके गिर पड़े और आंसू बहाने लगे। तेजसिंह समझाने लगे कि ”आप इतने बेताब क्यों हो गये। जिस ईश्वर ने यहां तक हमें पहुंचाया वही फिर उस जगह पहुंचायेगा जहां कुमारी है!” कुमार ने कहा, “भाई, अब मैं चंद्रकान्ता के मिलने से नाउम्मीद हो गया, जरूर वह परलोक को गई।” तेजसिंह ने कहा, “कभी नहीं, अगर ऐसा होता तो इन्हीं लोगों में वह भी पड़ी होती।” देवीसिंह बोले,


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गहने सब टूटे-फूटे पड़े थे और चारों तरफ खून जमा हुआ था। कुमार से न रहा गया, एकदम ‘हाय’ करके गिर पड़े और आंसू बहाने लगे। तेजसिंह समझाने लगे कि ”आप इतने बेताब क्यों हो गये। जिस ईश्वर ने यहां तक हमें पहुंचाया वही फिर उस जगह पहुंचायेगा जहां कुमारी है!” कुमार ने कहा, “भाई, अब मैं चंद्रकान्ता के मिलने से नाउम्मीद हो गया, जरूर वह परलोक को गई।” तेजसिंह ने कहा, “कभी नहीं, अगर ऐसा होता तो इन्हीं लोगों में वह भी पड़ी होती।” देवीसिंह बोले,


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