“भला वहां तो चलो जहां तुमने शिवदत्त की रानी को रखा है।” तेजसिंह ने कहा चलो। तीनों वहां गये, देखा कि महारानी कलावती भी वहां नहीं है, और भी तबीयत परेशान हुई।
आधी रात से ज्यादा जा चुकी थी, तीनों आदमी बैठे सोच रहे थे कि यह क्या मामला हो गया। यकायक देवीसिह बोले, “गुरुजी, मुझे एक तरकीब सूझी है जिसके करने से यह पता लग जायगा कि क्या मामला है। आप ठहरिए, इसी जगह आराम कीजिए मैं पता लगाता हूं, अगर बन पड़ेगा तो ठीक पता लगाने का सबूत भी लेता आऊंगा।” तेजसिंह ने कहा,
“भला वहां तो चलो जहां तुमने शिवदत्त की रानी को रखा है।” तेजसिंह ने कहा चलो। तीनों वहां गये, देखा कि महारानी कलावती भी वहां नहीं है, और भी तबीयत परेशान हुई।
आधी रात से ज्यादा जा चुकी थी, तीनों आदमी बैठे सोच रहे थे कि यह क्या मामला हो गया। यकायक देवीसिह बोले, “गुरुजी, मुझे एक तरकीब सूझी है जिसके करने से यह पता लग जायगा कि क्या मामला है। आप ठहरिए, इसी जगह आराम कीजिए मैं पता लगाता हूं, अगर बन पड़ेगा तो ठीक पता लगाने का सबूत भी लेता आऊंगा।” तेजसिंह ने कहा,