एकटक देखने लगे। देखा कि महाराज शिवदत्त के दाहिनी तरफ चंद्रकान्ता और बाईं तरफ चपला, दोनों के हाथों में हाथ दिये धीरे- धीरे आकर उस गद्दी पर बैठ गये जो बीच में बिछी हुई थी। चंद्रकान्ता और चपला भी दोनों तरफ सटकर महाराज के पास बैठ गईं!
चंद्रकान्ता और कुमार का साथ तो लड़कपन ही से था मगर आज चंद्रकान्ता की खूबसूरती और नजाकत जितनी बढ़ी-चढ़ी थी इसके पहले कुमार ने कभी नहीं देखी थी। सामने पानदान, इत्रदान वगैरह सब सामान ऐश का रखा हुआ था।
एकटक देखने लगे। देखा कि महाराज शिवदत्त के दाहिनी तरफ चंद्रकान्ता और बाईं तरफ चपला, दोनों के हाथों में हाथ दिये धीरे- धीरे आकर उस गद्दी पर बैठ गये जो बीच में बिछी हुई थी। चंद्रकान्ता और चपला भी दोनों तरफ सटकर महाराज के पास बैठ गईं!
चंद्रकान्ता और कुमार का साथ तो लड़कपन ही से था मगर आज चंद्रकान्ता की खूबसूरती और नजाकत जितनी बढ़ी-चढ़ी थी इसके पहले कुमार ने कभी नहीं देखी थी। सामने पानदान, इत्रदान वगैरह सब सामान ऐश का रखा हुआ था।