मगर महाराज शिवदत्त पर वार न किया।
महाराज शिवदत्त सम्हलकर उठ खड़े हुए, यकायकी इस तरह की ताकत और तेजी कुमार की देख सकते में हो गये, मुंह से आवाज तक न निकली,जवांमर्दी हवा खाने चली गई, सामने खड़े होकर कुमार का मुंह देखने लगे।
कुंअर वीरेन्द्रसिंह खून भरी नंगी तलवार लिये खड़े थे कि तेजसिंह और देवीसिंह धाम्म से सामने आ मौजूद हुए। तेजसिंह ने आवाज दी, “वाह शाबास,खूब दिल को सम्हाला।” यह कह झट से महाराज शिवदत्त के गले में कमंद
मगर महाराज शिवदत्त पर वार न किया।
महाराज शिवदत्त सम्हलकर उठ खड़े हुए, यकायकी इस तरह की ताकत और तेजी कुमार की देख सकते में हो गये, मुंह से आवाज तक न निकली,जवांमर्दी हवा खाने चली गई, सामने खड़े होकर कुमार का मुंह देखने लगे।
कुंअर वीरेन्द्रसिंह खून भरी नंगी तलवार लिये खड़े थे कि तेजसिंह और देवीसिंह धाम्म से सामने आ मौजूद हुए। तेजसिंह ने आवाज दी, “वाह शाबास,खूब दिल को सम्हाला।” यह कह झट से महाराज शिवदत्त के गले में कमंद