चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

एक सिरा उसका उस किवाड़ के पल्ले में खूब मजबूती के साथ बांधा, दूसरा सिरा उस कमंद का उसीदलान के एक खंभे में जो किवाड़ के पास ही था बांधा, इसके बाद एक ढोंका पत्थर का दूर से उस तहखाने में डाला। पत्थर पड़ते ही इस तरह की आवाज आने लगी जैसे किसी हाथी में से जोर से हवा निकलने की आवाज आती है, साथ ही इसके जल्दी से एक पल्ला भी बंद हो गया, दूसरा पल्ला भी बंद होने के लिए खिंचा मगर वह कमंद से कसा हुआ था, उसको तोड़ न सका, खिंचा का खिंचा ही रह गया। चपला ने सोचा-”कोई हर्ज नहीं,


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एक सिरा उसका उस किवाड़ के पल्ले में खूब मजबूती के साथ बांधा, दूसरा सिरा उस कमंद का उसीदलान के एक खंभे में जो किवाड़ के पास ही था बांधा, इसके बाद एक ढोंका पत्थर का दूर से उस तहखाने में डाला। पत्थर पड़ते ही इस तरह की आवाज आने लगी जैसे किसी हाथी में से जोर से हवा निकलने की आवाज आती है, साथ ही इसके जल्दी से एक पल्ला भी बंद हो गया, दूसरा पल्ला भी बंद होने के लिए खिंचा मगर वह कमंद से कसा हुआ था, उसको तोड़ न सका, खिंचा का खिंचा ही रह गया। चपला ने सोचा-”कोई हर्ज नहीं,


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