चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

उसके कपड़े मैं न दूंगा क्योंकि इसी सूरत से बाहर चला जाता हूँ। देखो, सिवाय तुम तीनों को यह हाल और किसी को न मालूम हो, नहीं तो सब काम बिगड़ जायेगा।

चन्द्रकान्ता ने तेजसिंह से ताकीद की कि ‘‘दूसरे, तीसरे दिन तुम जरूर यहाँ आया करो, तुम्हारे आने से हिम्मत बनी रहती है।’’

‘‘बहुत अच्छा, मैं ऐसा ही करूँगा !’’ यह कहकर तेजसिंह चलने को तैयार हुए। चन्द्रकान्ता उन्हें देख रोकर बोली, ‘‘क्यों तेजसिंह, क्या मेरी किस्मत में कुमार की मुलाकात


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उसके कपड़े मैं न दूंगा क्योंकि इसी सूरत से बाहर चला जाता हूँ। देखो, सिवाय तुम तीनों को यह हाल और किसी को न मालूम हो, नहीं तो सब काम बिगड़ जायेगा।

चन्द्रकान्ता ने तेजसिंह से ताकीद की कि ‘‘दूसरे, तीसरे दिन तुम जरूर यहाँ आया करो, तुम्हारे आने से हिम्मत बनी रहती है।’’

‘‘बहुत अच्छा, मैं ऐसा ही करूँगा !’’ यह कहकर तेजसिंह चलने को तैयार हुए। चन्द्रकान्ता उन्हें देख रोकर बोली, ‘‘क्यों तेजसिंह, क्या मेरी किस्मत में कुमार की मुलाकात


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