कल की तरह आज की रात भी बीत गई। लोंडियों के साथ सुबह को सब औरतें पारी-पारी मैदान भेजी गईं। महारानी और चंपा आज भी नहीं गईं। चंपा ने महारानी से पूछा, “आप जब से इन लोगों के हाथ फंसी हैं, कुछ भोजन किया या नहीं!” उन्होंने जवाब दिया, “महाराज से मिलने की उम्मीद में जान बचाने के लिए दूसरे-तीसरे कुछ खा लेती हूं, क्या करूं, कुछ बस नहीं चलता।”
थोड़ी देर बाद दो आदमी इस डेरे में आये। महारानी और चंपा से बोले, “तुम दोनों बाहर चलो,
कल की तरह आज की रात भी बीत गई। लोंडियों के साथ सुबह को सब औरतें पारी-पारी मैदान भेजी गईं। महारानी और चंपा आज भी नहीं गईं। चंपा ने महारानी से पूछा, “आप जब से इन लोगों के हाथ फंसी हैं, कुछ भोजन किया या नहीं!” उन्होंने जवाब दिया, “महाराज से मिलने की उम्मीद में जान बचाने के लिए दूसरे-तीसरे कुछ खा लेती हूं, क्या करूं, कुछ बस नहीं चलता।”
थोड़ी देर बाद दो आदमी इस डेरे में आये। महारानी और चंपा से बोले, “तुम दोनों बाहर चलो,