दरवाजा बंद कर ये लोग आगे बढ़े। मैदान में जाकर महारानी की गठरी खोल उन्हें होश में लाये और कहा, “हमारे साथ-साथ चली आइए, आपको महाराज के पास पहुंचा दें।” महरानी इन लोगों के साथ-साथ आगे बढ़ीं। तेजसिंह ने ज्योतिषीजी से पूछा, “बताइए चंद्रकान्ता कहां हैं?” ज्योतिषीजी ने कहा, “मैं पहले कभी इसके अंदर आया नहीं जो सब जगहें मेरी देखी हों, आप आगे चलिए, महाराज शिवदत्त को ढूंढिए, चंद्रकान्ता भी दिखाई दे जायगी।”
घूमते-फिरते महाराज शिवदत्त
दरवाजा बंद कर ये लोग आगे बढ़े। मैदान में जाकर महारानी की गठरी खोल उन्हें होश में लाये और कहा, “हमारे साथ-साथ चली आइए, आपको महाराज के पास पहुंचा दें।” महरानी इन लोगों के साथ-साथ आगे बढ़ीं। तेजसिंह ने ज्योतिषीजी से पूछा, “बताइए चंद्रकान्ता कहां हैं?” ज्योतिषीजी ने कहा, “मैं पहले कभी इसके अंदर आया नहीं जो सब जगहें मेरी देखी हों, आप आगे चलिए, महाराज शिवदत्त को ढूंढिए, चंद्रकान्ता भी दिखाई दे जायगी।”
घूमते-फिरते महाराज शिवदत्त