चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

नाजिम को बंधा-पा झट से उसकी रस्सी खोली और तहखाने के बाहर आकर बोला, ‘‘चलो जल्दी, इस बगीचे के बाहर हो जायें तब सब हाल सुनें कि क्या हुआ।’’

नाजिम और अहमद बगीचे के बाहर आये और चलते-चलते आपस में बाच-चीत करने लगे। नाजिम ने चपला के हाथ फंस जाने और कोड़ा खाने का पूरा हाल कहा।

अहमदः भाई नाजिम, जब तक पहले चपला को हम लोग न पकड़ लेंगे तब तक कोई काम न होगा, क्योंकि चपला बड़ी चालाक है और धीरे-धीरे चम्पा को भी तेज कर रही है। अगर वह


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नाजिम को बंधा-पा झट से उसकी रस्सी खोली और तहखाने के बाहर आकर बोला, ‘‘चलो जल्दी, इस बगीचे के बाहर हो जायें तब सब हाल सुनें कि क्या हुआ।’’

नाजिम और अहमद बगीचे के बाहर आये और चलते-चलते आपस में बाच-चीत करने लगे। नाजिम ने चपला के हाथ फंस जाने और कोड़ा खाने का पूरा हाल कहा।

अहमदः भाई नाजिम, जब तक पहले चपला को हम लोग न पकड़ लेंगे तब तक कोई काम न होगा, क्योंकि चपला बड़ी चालाक है और धीरे-धीरे चम्पा को भी तेज कर रही है। अगर वह


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