वह पत्ता और एक छोटा-सा पत्थर बांधा इस अंदाज से फेंका कि नाले के किनारे कुछ जल में गिरा। तेजसिंह ने उसे ढूंढकर निकाला, गिरह खोली, पत्तो पर गोर से निगाह डाली,लिखा था, “तुम जाकर पहले कुमार को यहां ले आओ।”
तेजसिंह ने ज्योतिषीजी को वह पत्ता दिखलाया और कहा, “आप यहां ठहरिए मैं जाकर कुमार को बुला लाता हूं। तब तक आप भी कोई तरकीब सोचिए जिससे कुमारी नीचे उतर सकें!” ज्योतिषीजी ने कहा, “अच्छी बात है, तुम जाओ, मैं कोई तरकीब सोचता हूं।”
वह पत्ता और एक छोटा-सा पत्थर बांधा इस अंदाज से फेंका कि नाले के किनारे कुछ जल में गिरा। तेजसिंह ने उसे ढूंढकर निकाला, गिरह खोली, पत्तो पर गोर से निगाह डाली,लिखा था, “तुम जाकर पहले कुमार को यहां ले आओ।”
तेजसिंह ने ज्योतिषीजी को वह पत्ता दिखलाया और कहा, “आप यहां ठहरिए मैं जाकर कुमार को बुला लाता हूं। तब तक आप भी कोई तरकीब सोचिए जिससे कुमारी नीचे उतर सकें!” ज्योतिषीजी ने कहा, “अच्छी बात है, तुम जाओ, मैं कोई तरकीब सोचता हूं।”