चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

में आकर ये लोग ऊपर निकले और धीरे- धीरे खंडहर के बाहर हो गये।

थोड़ा दिन बाकी था जब कुंअर वीरेन्द्रसिंह अपने डेरे में पहुंचे। यह राय ठहरी कि रात में इस किताब को पढ़ना चाहिए, मगर तेजसिंह को यह जल्दी थी कि किसी तरह फूलों के गुण मालूम हों। कुमार से कहा, “इस वक्त इन फूलों के गुण पढ़ लीजिए बाकी रात को पढ़ियेगा।” कुमार ने हंसकर कहा, “जब कुल तिलिस्म टूट लेगा तब फूलों के गुण पढ़े जायेंगे।” तेजसिंह ने बड़ी खुशामद की, आखिर लाचार


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में आकर ये लोग ऊपर निकले और धीरे- धीरे खंडहर के बाहर हो गये।

थोड़ा दिन बाकी था जब कुंअर वीरेन्द्रसिंह अपने डेरे में पहुंचे। यह राय ठहरी कि रात में इस किताब को पढ़ना चाहिए, मगर तेजसिंह को यह जल्दी थी कि किसी तरह फूलों के गुण मालूम हों। कुमार से कहा, “इस वक्त इन फूलों के गुण पढ़ लीजिए बाकी रात को पढ़ियेगा।” कुमार ने हंसकर कहा, “जब कुल तिलिस्म टूट लेगा तब फूलों के गुण पढ़े जायेंगे।” तेजसिंह ने बड़ी खुशामद की, आखिर लाचार


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