क्योंकि इसकी जिल्द पर एक तरफ मोटे-मोटे सुनहरे हरफों में ‘तिलिस्म’ लिखा हुआ है। सोचने लगे-‘इस किताब को तो ऐयार लोग चुरा ले गये थे, तेजसिंह इसकी खोज में गये हैं। इसके हाथ यह किताब क्यों कर लगी? यह कौन है और किताब देख-देखकर रोती क्यों है!!’
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : पहला बयान)
वह नाजुक औरत जिसके हाथ में किताब है और जो सब औरतों के आगे-आगे आ रही है, कौन और कहां की रहने वाली है जब तक यह न मालूम हो जाय तब तक हम उसको वनकन्या के नाम से लिखेंगे।
क्योंकि इसकी जिल्द पर एक तरफ मोटे-मोटे सुनहरे हरफों में ‘तिलिस्म’ लिखा हुआ है। सोचने लगे-‘इस किताब को तो ऐयार लोग चुरा ले गये थे, तेजसिंह इसकी खोज में गये हैं। इसके हाथ यह किताब क्यों कर लगी? यह कौन है और किताब देख-देखकर रोती क्यों है!!’
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : पहला बयान)
वह नाजुक औरत जिसके हाथ में किताब है और जो सब औरतों के आगे-आगे आ रही है, कौन और कहां की रहने वाली है जब तक यह न मालूम हो जाय तब तक हम उसको वनकन्या के नाम से लिखेंगे।