फतहसिंह-मगर फिर वह किताब इसके हाथ कैसे लगी?
कुमार-इसका तो ताज्जुब हई है मगर इससे भी ज्यादे ताज्जुब की एक बात और है, शायद तुमने ख्याल नहीं किया।
फतह-नहीं, वह क्या?
कुमार-वह तस्वीर भी मेरी ही है जिसको बगल वाली औरत के हाथ से उसने लिया था।
फतह-यह तो आपने और भी आश्चर्य की बात सुनाई।
कुमार-मैं तो अजब हैरानी में पड़ा हूं, कुछ समझ ही नहीं आता कि क्या मामला है। अच्छा चलो पीछे-पीछे देखें ये सब जाती कहां हैं।
फतह-चलिए।
कुमार
फतहसिंह-मगर फिर वह किताब इसके हाथ कैसे लगी?
कुमार-इसका तो ताज्जुब हई है मगर इससे भी ज्यादे ताज्जुब की एक बात और है, शायद तुमने ख्याल नहीं किया।
फतह-नहीं, वह क्या?
कुमार-वह तस्वीर भी मेरी ही है जिसको बगल वाली औरत के हाथ से उसने लिया था।
फतह-यह तो आपने और भी आश्चर्य की बात सुनाई।
कुमार-मैं तो अजब हैरानी में पड़ा हूं, कुछ समझ ही नहीं आता कि क्या मामला है। अच्छा चलो पीछे-पीछे देखें ये सब जाती कहां हैं।
फतह-चलिए।
कुमार