उसका हाल कहने का कुछ मौका तो मिला नहीं तुम पहले से ही रोने लगे!!” इतना कह के कुमार ने उस तरफ देखा जिधर वे औरतें गई थीं मगर कुछ दिखाई न पड़ा। तेजसिंह ने घबराकर कहा, “आपने किसके हाथ में किताब देखी? वह आदमी कहां है?” कुमार ने जवाब दिया, “मैं क्या बताऊं कहां है, चलो उस तरफ शायद दिखाई दे जाय, हाय विपत पर विपत बढ़ती ही जाती है!”
आगे-आगे कुमार तथा पीछे-पीछे तीनों ऐयार और फतहसिंह उस तरफ चले जिधर वे औरतें गई थीं, मगर तेजसिंह,
उसका हाल कहने का कुछ मौका तो मिला नहीं तुम पहले से ही रोने लगे!!” इतना कह के कुमार ने उस तरफ देखा जिधर वे औरतें गई थीं मगर कुछ दिखाई न पड़ा। तेजसिंह ने घबराकर कहा, “आपने किसके हाथ में किताब देखी? वह आदमी कहां है?” कुमार ने जवाब दिया, “मैं क्या बताऊं कहां है, चलो उस तरफ शायद दिखाई दे जाय, हाय विपत पर विपत बढ़ती ही जाती है!”
आगे-आगे कुमार तथा पीछे-पीछे तीनों ऐयार और फतहसिंह उस तरफ चले जिधर वे औरतें गई थीं, मगर तेजसिंह,