तेज-क्या बतावें मामला ही बिगड़ गया।
कुमार-सो क्या?
तेज-तहखाने का दरवाजा नहीं खुलता।
कुमार-किसी ने भीतर से तो बंद नहीं कर लिया।
तेज-नहीं भीतर तो कोई ताला ही नहीं है।
ज्यो-दो बातों में से एक बात जरूर है, या तो कोई नया आदमी पहुंचा जिसने दरवाजा खोलने की कल बिगाड़ दी, या फिर महाराज शिवदत्त ने भीतर से कोई चालाकी की।
तेज-भला शिवदत्त अंदर से बंद करके अपने को और बला में क्यों फंसावेंगे? इसमें तो उनका हर्ज ही है कुछ फायदा नहीं।
तेज-क्या बतावें मामला ही बिगड़ गया।
कुमार-सो क्या?
तेज-तहखाने का दरवाजा नहीं खुलता।
कुमार-किसी ने भीतर से तो बंद नहीं कर लिया।
तेज-नहीं भीतर तो कोई ताला ही नहीं है।
ज्यो-दो बातों में से एक बात जरूर है, या तो कोई नया आदमी पहुंचा जिसने दरवाजा खोलने की कल बिगाड़ दी, या फिर महाराज शिवदत्त ने भीतर से कोई चालाकी की।
तेज-भला शिवदत्त अंदर से बंद करके अपने को और बला में क्यों फंसावेंगे? इसमें तो उनका हर्ज ही है कुछ फायदा नहीं।