कुमार-उसकी खत में तो यह भी लिखा है कि ‘मैं किसी तरह रुतबे में कुमारी से कम नहीं हूं।’
ये बातें हो ही रही थीं कि चोबदार ने आकर अर्ज किया, “एक सिपाही बाहर आया है और जो हाजिर होकर कुछ कहना चाहता है।” कुमार ने कहा, “उसे ले आओ।” चोबदार उस सिपाही को अंदर ले आया, सबों ने देखा कि अजीब रंग-ढंग का आदमी है। नाटा-सा कद, काला रंग, टाट का चपकन पायजामा जिसके ऊपर से लैस टंकी हुई, सिर पर दौरी की तरह बांस की टोपी, ढाल-तलवार लगाये था। उसने झुककर कुमार को सलाम किया।
कुमार-उसकी खत में तो यह भी लिखा है कि ‘मैं किसी तरह रुतबे में कुमारी से कम नहीं हूं।’
ये बातें हो ही रही थीं कि चोबदार ने आकर अर्ज किया, “एक सिपाही बाहर आया है और जो हाजिर होकर कुछ कहना चाहता है।” कुमार ने कहा, “उसे ले आओ।” चोबदार उस सिपाही को अंदर ले आया, सबों ने देखा कि अजीब रंग-ढंग का आदमी है। नाटा-सा कद, काला रंग, टाट का चपकन पायजामा जिसके ऊपर से लैस टंकी हुई, सिर पर दौरी की तरह बांस की टोपी, ढाल-तलवार लगाये था। उसने झुककर कुमार को सलाम किया।