चन्द्रकान्ता - Chandrakanta


कुमार ने कहा, “उसे जल्दी अंदर लाओ।” चोबदार ने उस बुङ्ढी को हाजिर किया, देखते ही तेजसिंह के मुंह से निकला, “क्या पिशाचों और डाकिनियों का दरबा खुल पड़ा है?”

उस बुङ्ढी ने भी यह बात सुन ली, लाल-लाल आंखें कर तेजसिंह की तरफ देखने लगी और बोली, “बस कुछ न कहूंगी जाती हूं, मेरा क्या बिगड़ेगा, जो कुछ नुकसान होगा कुमार का होगा।” यह कह खेमे के बाहर चली गई। कुमार का इशारा पा चोबदार समझा-बुझाकर उसे पुन: ले आया।

यह औरत भी अजीब सूरत की थी। उम्र लगभग सत्तार वर्ष के होगी,


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कुमार ने कहा, “उसे जल्दी अंदर लाओ।” चोबदार ने उस बुङ्ढी को हाजिर किया, देखते ही तेजसिंह के मुंह से निकला, “क्या पिशाचों और डाकिनियों का दरबा खुल पड़ा है?”

उस बुङ्ढी ने भी यह बात सुन ली, लाल-लाल आंखें कर तेजसिंह की तरफ देखने लगी और बोली, “बस कुछ न कहूंगी जाती हूं, मेरा क्या बिगड़ेगा, जो कुछ नुकसान होगा कुमार का होगा।” यह कह खेमे के बाहर चली गई। कुमार का इशारा पा चोबदार समझा-बुझाकर उसे पुन: ले आया।

यह औरत भी अजीब सूरत की थी। उम्र लगभग सत्तार वर्ष के होगी,


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