देवी-कब गए?
फतह-तुम्हारे जाने के थोड़ी देर बाद।
देवी-इतने गुस्से में ओस्ताद का जाना खाली न होगा, जरूर कोई अच्छा काम करके आवेंगे!
कुमार-देखना चाहिए।
इतने में तेजसिंह और ज्योतिषीजी वहां आ पहुंचे। इस वक्त उनके चेहरे पर खुशी और मुस्कराहट झलक रही थी जिससे सब समझे कि जरूर कोई काम कर आए हैं। कुमार ने पूछा, “क्यों क्या खबर है?”
तेज-अच्छी खबर है।
कुमार-कुछ कहोगे भी कि इसी तरह?
तेज-आप सुन के क्या कीजिएगा?
कुमार-क्या मेरे सुनने लायक नहीं है?
देवी-कब गए?
फतह-तुम्हारे जाने के थोड़ी देर बाद।
देवी-इतने गुस्से में ओस्ताद का जाना खाली न होगा, जरूर कोई अच्छा काम करके आवेंगे!
कुमार-देखना चाहिए।
इतने में तेजसिंह और ज्योतिषीजी वहां आ पहुंचे। इस वक्त उनके चेहरे पर खुशी और मुस्कराहट झलक रही थी जिससे सब समझे कि जरूर कोई काम कर आए हैं। कुमार ने पूछा, “क्यों क्या खबर है?”
तेज-अच्छी खबर है।
कुमार-कुछ कहोगे भी कि इसी तरह?
तेज-आप सुन के क्या कीजिएगा?
कुमार-क्या मेरे सुनने लायक नहीं है?