चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : नौवां बयान)
जब दरबार बर्खास्त हुआ आधी रात जा चुकी थी। फतहसिंह दीवान साहब को लेकर अपने खेमे में गये। थोड़ी देर बाद कुमार के खेमे में तेजसिंह,देवीसिंह, और ज्योतिषीजी फिर इकट्ठे हुए। उस वक्त सिवाय इन चारों आदमियों के और कोई वहां न था।
कुमार-क्यों तेजसिंह, बुढ़िया की बात तो ठीक निकली!
तेज-जी हां, मगर महाराज शिवदत्त की खत से तो कुछ और ही बात पाई जाती है।
देवी-उसके लिखने का कौन ठिकाना, कहीं वह धोखा न देता हो।
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : नौवां बयान)
जब दरबार बर्खास्त हुआ आधी रात जा चुकी थी। फतहसिंह दीवान साहब को लेकर अपने खेमे में गये। थोड़ी देर बाद कुमार के खेमे में तेजसिंह,देवीसिंह, और ज्योतिषीजी फिर इकट्ठे हुए। उस वक्त सिवाय इन चारों आदमियों के और कोई वहां न था।
कुमार-क्यों तेजसिंह, बुढ़िया की बात तो ठीक निकली!
तेज-जी हां, मगर महाराज शिवदत्त की खत से तो कुछ और ही बात पाई जाती है।
देवी-उसके लिखने का कौन ठिकाना, कहीं वह धोखा न देता हो।