चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

“क्यों तेजसिंह, आखिर तुमने इसको मार ही डाला।”

तेज-भला हम लोग एकाएक इस तरह किसी को मारते हैं?

कुमार-तो फिर किसने मारा?

तेज-मैं क्या जानूं।

कुमार-फिर लाश को कहां से लाये?

तेज-बालादवी करते (गश्त लगाते) हम लोग इस तिलिस्मी खंडहर के पिछवाड़े चले गये। दूर से देखा कि तीन-चार आदमी खड़े हैं। जब तक हम लोग पास जायं, वे सब भाग गये। देखा तो क्रूर की लाश पड़ी थी। तब देवीसिंह को भेज यहां से डोली और कहार मंगवाये और इस लाश को त्यों का ज्यों उठवा लाए,


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“क्यों तेजसिंह, आखिर तुमने इसको मार ही डाला।”

तेज-भला हम लोग एकाएक इस तरह किसी को मारते हैं?

कुमार-तो फिर किसने मारा?

तेज-मैं क्या जानूं।

कुमार-फिर लाश को कहां से लाये?

तेज-बालादवी करते (गश्त लगाते) हम लोग इस तिलिस्मी खंडहर के पिछवाड़े चले गये। दूर से देखा कि तीन-चार आदमी खड़े हैं। जब तक हम लोग पास जायं, वे सब भाग गये। देखा तो क्रूर की लाश पड़ी थी। तब देवीसिंह को भेज यहां से डोली और कहार मंगवाये और इस लाश को त्यों का ज्यों उठवा लाए,


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