चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

यहां कब तक पड़े रहना होगा, वहां लश्कर वालों की हमारी खोज में क्या दशा होगी, इत्यादि बातों को सोचते-सोचते कुमार को नींद आ गई और बेखबर सो गये।

दो घंटे रात बीते तक कुमार सोये रहे। इसके बाद बीन की और उसके साथ ही किसी के गाने की आवाज कानों में पड़ी। झट आंखें खोल इधर-उधरदेखने लगे, मालूम हुआ कि यह वह कमरा नहीं है जिसमें भोजन करके सोये थे, बल्कि इस वक्त अपने को एक निहायत खूबसूरत सजी हुई बारहदरी में पाया जिसके बाहर से बीन और गाने की आवाज आ रही थी।


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यहां कब तक पड़े रहना होगा, वहां लश्कर वालों की हमारी खोज में क्या दशा होगी, इत्यादि बातों को सोचते-सोचते कुमार को नींद आ गई और बेखबर सो गये।

दो घंटे रात बीते तक कुमार सोये रहे। इसके बाद बीन की और उसके साथ ही किसी के गाने की आवाज कानों में पड़ी। झट आंखें खोल इधर-उधरदेखने लगे, मालूम हुआ कि यह वह कमरा नहीं है जिसमें भोजन करके सोये थे, बल्कि इस वक्त अपने को एक निहायत खूबसूरत सजी हुई बारहदरी में पाया जिसके बाहर से बीन और गाने की आवाज आ रही थी।


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